प्रभु ने दी हरी झंडी-विश्व की पहली सोलर एनर्जी डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टी यूनिट) ट्रेन चालू

Report : Parveen Komal

नई दिल्लीः विश्व की पहली सोलर एनर्जी डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टी यूनिट) ट्रेन चलाने का गौरव भारतीय रेलवे को मिला है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज विश्व की पहली सोलर एनर्जी की ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. ये ट्रेन दिल्ली के सराय रोहिल्ला से गुरुग्राम (पूर्व गुड़गांव) के फारुख नगर तक चलेगी. इसके साथ ही आज भारतीय रेलवे ने विश्व की पहली सोलर एनर्जी की ट्रेन चलाने की शुरुआत कर बड़ा मुकाम हासिल किया है.

सफदरगंज रेलवे स्टेशन पर उद्घाटन के लिए लाई गई इस ट्रेन में इंजन के अलावा सबकुछ सोलर एनर्जी से चल रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे की मंशा तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने की है जिससे क्लीन-ग्रीन एनर्जी से चलने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सके.

 

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 जानें ट्रेन की खास बातें

  • ये ट्रेन भारतीय रेलवे की पहली सौर ऊर्जा युक्त डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टि यूनिट) ट्रेन है. इस ट्रेन की छत पर सौर पैनल लगा है जो केबिन में रोशनी और पंखा चलाने के लिए लगे हैं. इसके हरेक कोच में 16 सौर पैनल लगे हैं जिनकी कुल क्षमता 4.5 किलोवाट है. हर कोच में 120 एंपीयर पर आवर कैपेसिटी की बैटरीज भी हैं.
  • इस ट्रेन में गद्देदार सीटों का इस्तेमाल किया गया है साथ ही हरेक कोच में एक डिस्प्ले बोर्ड लगा है. वहीं पैसेंजर्स के सामान रखने के लिए रैक भी बनाए गए है जिसका इस्तेमाल रात में हो सकेगा.
  • यह ट्रेन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी में बनी है. इस 6 कोच वाले रैक पर दिल्ली के शकूरबस्ती वर्कशॉप में सौर पैनलों लगाए गए है. अगले छह महीने में शकूर बस्ती वर्कशॉप में इस तरह के 24 और कोच तैयार किए जा रहे हैं.
  • इस ट्रेन की कुल लागत 13.54 करोड़ रुपये है. प्रत्येक पैसेंजर कोच बनाने में 1 करोड़ जबकि मोटर कोच बनाने में 2.5 करोड़ खर्च हुए हैं. इसके अलावा हर सोलर पैनल पर 9 लाख रुपये का खर्च आया है.
  • सोलर ट्रेन से प्रति कोच सालाना दो लाख रुपये के डीजल की बचत होगी. साथ ही प्रति वर्ष 9 टन कार्बन डाइऑक्साइड कम पैदा होगा. कुल मिलाकर सालाना 672 करोड़ रुपये के बचत होगी. अगले 25 सालों में रेलवे सोलर पैनलों की बदौलत हर ट्रेन में 5.25 लाख लीटर डीजल बचा सकता है. इस दौरान रेलवे को प्रति ट्रेन 3 करोड़ रुपये की बचत होगी. वहीं सोलर पावर के जरिए 25 सालों में प्रति ट्रेन 1350 टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सजर्न कम होगा. इन सोलर प्रोजेक्ट ट्रेन से रेलवे को हर साल 700 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.
  • इस ट्रेन में दस कोच हैं जिसमें 2 मोटर, 8 पैसेंजर कोच हैं. अगले कुछ दिनों में 50 अन्य कोचों में ऐसे ही सोलर पैनल्स लगाने की योजना है. सोलर पावर पहले शहरी ट्रेनों और फिर लंबी दूरी की ट्रेनों में लगाए जाएंगे.
  • विश्व में पहली बार ऐसा हुआ है कि सोलर पैनलों का इस्तेमाल रेलवे में ग्रिड के रूप में किया गया. शिमला कालका टॉय ट्रेन की छोटी लाइन पर पहले से सौर ऊर्जा ट्रेन चल रही हैं और इसकी बड़ी लाइन की कई ट्रेनों के 1-2 कोच में सोलर पैनल लगे हैं. आपको बता दें कि राजस्थान में भी सोलर पैनल से वाली लोकल ट्रेन का ट्रायल हो गया है. हालांकि ये सोलर एनर्जी को सेव यानी करने की सुविधा नहीं रखती है.

सफर के दौरान क्या होते हैं एक यात्री के अधिकार ?

Report : Parveen Komal

नई दिल्ली: इंडियन रेलवे भारतीयों की जिंदगी में एक खास स्थान रखता है. यात्रियों को अच्छी और सुरक्षित यात्रा कराना भारतीय रेलवे की जिम्मेदारी है. रेल विभाग की तरफ से अपने यात्रियों को कई सुविधाएं दी जाती हैं लेकिन इन सुविधाओं के बारे में अधिक जानकारी न होने की वजह से यात्रियों को सफर के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. आज हम आपको रेल सफर से जुड़े कुछ अधिकारों के बारे में बताएंगे जिनके बारे में ज्यादातर यात्रियों को पता नहीं होता.

सफर के दौरान क्या होते हैं एक यात्री के अधिकार ?
अगर आप रेल से सफर करने जा रहे हैं तो अपने इन अधिकारों के बारे में जान लीजिए. क्योंकि एक रेल यात्री को अपने इन अधिकारों के बारे जानकारी होनी जरूरी है.

अगर आपका आरक्षित टिकट खो गया है फिर भी आप कुछ अतिरिक्त किराया देकर यात्रा कर सकते हैं.अगर आप सिर्फ प्लेटफार्म टिकट के साथ ट्रेन में चढ़ गए हैं तो परेशान न हों और TTE के पास जाकर टिकट बनवा लें.आरएसी टिकट वाले यात्रियों को यात्रा के दौरान हाफ सीट मुहैया कराना TTE की जिम्मेदारी होती है.
रोगी, वरिष्ठ नागरिक, पुरस्कार प्राप्तकर्ता, युद्ध शहीदों की विधवाएं, छात्र, युवा, किसान, कलाकार-खिलाड़ी और चिकित्सा व्यावसायी समेत रेलवे कई और श्रेणियों में रियायत देता है. इन रियायतों के बारे में आप ज्यादा जानकारी ‘रियायत नियम’ पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं.

सफर के दौरान TTE को करने होते हैं ये जरूरी काम..?
सफर के दौरान अक्सर यात्रियों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा है. इन समस्याओें में साफ सफाई पानी की दिक्कत और महिला सुरक्षा मुख्य हैं. यात्रा के दौरान हमें समझ में नहीं आता है कि हम इन समस्याओं से कैसे निपटें? आपके लिए ये जानना जरूरी है कि सफर के दौरान TTE का काम सिर्फ टिकट चेक करना नहीं होता है.

रेल यात्रा करने वाले बहुत कम लोगों को पता होता है कि ट्रेन के दरवाजों को खुलवाना और बंद करवाना भी TTE का ही काम होता है.ट्रेन में यात्रा कर रही अकेली महिला के बगल में केवल किसी महिला को ही सीट देना भी TTE के कार्यक्षेत्र में आता है.ट्रेन में पानी खत्म हो जाने पर TTE को अगले स्टेशन पर ट्रेन में पानी भरवाना होता है.टॉयलेट गंदा होने की स्थिति में टॉयलेट को साफ करवाना भी TTE की जिम्मेदारियों में से एक है.ट्रेन में पंखे और लाइट खराब होने पर आप TTE से शिकायत कर सकते हैं. TTE को आपकी शिकायत पर एक्शन लेना ही होता है.ट्रेन में साफ-सफाई का ध्यान भी TTE को ही रखना होता है.TTE को यात्रा के दौरान साफ सुथरी वर्दी और नेम बैज के साथ होना भी जरूरी है.
रेलवे की तरफ से दी जाती है वरिष्ठ नागरिकों को विशेष छूट
60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक की सूची में आते हैं. वरिष्ठ नागरिक हमारे देश के गौरव हैं और उनके योगदान के कारण ही हमारा और आपका आज बेहतर हो रहा है. रेलवे विभाग की ओर से वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा के दौरान किराए में विशेष छूट दी जाती है. सरकार की इस विशेष छूट का फायदा हमारे बहुत कम वरिष्ठ नागरिक उठा पाते है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वे इस बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं.

पुरुष वरिष्ठ नागरिक को रेल किराए में 40 फीसदी छूट मिलती है तो वहीं महिला वरिष्ठ नागरिक को 50 फीसदी छूट मिलती है. भारतीय रेलवे के मुताबिक महिला वरिष्ठ नागरिक उसको माना जाएगा जिसकी आयु 58 वर्ष हो चुकी हो. इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आपके पास आईडी प्रूफ के तौर पर वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या फिर सीनियर सिटीजन कार्ड होना जरूरी है. टिकट बुक कराते समय वरिष्ठ नागरिक प्रमाण दिखाकर टिकट किराए में रेलवे की तरफ से दी जाने वाली छूट का फायदा उठा सकते हैं.

तेजस ट्रेन में हर सीट पर LCD और Wi-Fi का मज़ा, और भी है बहुत कुछ, देखें तस्वीरें

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे मुंबई और गोवा के बीच रेलवे जून से प्रीमियर ट्रेन ‘तेजस’ की शुरुआत करने जा रहा है.मीडिया सूत्रों के मुताबिक इस ट्रेन के यात्रियों को सेलिब्रिटी शेफ द्वारा तैयार व्यंजन खाने को मिलेंगे. इस खास ट्रेन में हर सीट पर एलसीडी स्क्रीन, चाय कॉफी के लिए वेंडिग मशीन का मज़ा मिलेगा.

 20 डिब्बों वाले तेजस एक्सप्रेस में स्वचालित दरवाजे और पूरी तरह बंद गैंगवे (डिब्बों को जोड़ने वाला रास्ता) होंगे. यह भारतीय रेलवे की इस तरह की पहली ट्रेन होगी. इस समय स्वचालित दरवाजे केवल मेट्रो में ही हैं. मुंबई-गोवा मार्ग पर शुरू होने के बाद यह ट्रेन सेवा दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर भी शुरू की जा सकती है.
 रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि तेजस चूंकि एक नई प्रीमियर क्लास ट्रेन है, इसमें चाय, कॉफी वेडिंग मशीन, पत्रिका, स्नैक्स टेबल सहित कई सुविधाएं होंगी. इसके अलावा टेन में बायो वैकम शौचालयों, टॉयलेट इंगेजमेंट बोर्ड, हैंड ड्रायर, सेंसराइज्ड टैप, वाई फाई सहित कई विशिष्ट सुविधाएं भी होंगी.

तेजस ट्रेन की ये रहीं खासियतें-

– मेट्रो की तरह स्लाइडिंग डोर वाली और मॉडर्न सुविधाओं से लैस होगी ये ट्रेन

-तेजस ट्रेन में विमानों की तरह ही सीट पर टीवी स्क्रीन, जीपीएस के जरिए अगले रेलवे स्टेशन की सूचना मिलेगी

-स्मोक डिटेक्शन सिस्टम और चाय-कॉफी की वेंडिंग मशीनें लगाना शामिल है

– ट्रेन में सेलिब्रिटी शेफ द्वारा तैयार मनपसंद खाना मिलेगा

-ट्रेन में बायो वैक्यूम टॉयलेट होंगे, जिनमें पानी का लेवल बताने के लिए इंडिकेटर होंगे

-बाथरूम में सेंसर वाले नल और हैंड ड्रायर होंगे

-हर कोच में इंटीग्रेटेड ब्रेल डिस्प्ले, डिजिटल डेस्टीनेशन बोर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक रिजर्वेशन चार्ट भी होंगे

तेजस के कोच में आग और धुएं का पता लगाने वाला और उन्हें रोकने वाला सिस्टम भी शामिल है

-तेजस के कोच में वाई-फाई सुविधा होगी

-इंटीरियर डिजायन को बेहद खास बनाया गया है

-एग्जीक्यूटिव क्लास और चेयर कार वाली तेजस एक्सप्रेस में कैटरिंग सर्विस राजधानी और शताब्दी ट्रेनों की तरह होगी

– चलती ट्रेन में इसके गेट लॉक होंगे और कोई भी पैसेंजर अंदर से गेट को नहीं खोल पाएगा

-इस तरह के गेट का फायदा यह होगा कि ट्रेन में लूटपाट जैसी अपराधिक घटनाओं पर भी रोक लग सकेगी

-ट्रेन के अंदर का कलर बाहर के कलर से मैच करेगा जिससे पैसेंजर्स को वर्ल्ड क्लास ट्रैवलिंग का अहसास मिलेगा

रेल टिकट की भाषा

GoRailwayGo Bureau

रेल यात्रा के दौरान हमारी नजर अगर किसी चीज पर कम जाती है तो वह है हमारा रेल टिकट, लेकिन टिकट पर लिखी हर बात का मतलब आपको पता होना बहुत जरूरी है। रेल टिकट पर लिखी कोड भाषा का अर्थ आपको समझाते हैं ।
कितनी तरह के रिजर्वेशन
यह जानना दिलचस्प है कि भारतीय रेल में रिजर्वेशन कितनी तरह का होता है। इस समय भारतीय रेल में आप तीन तरह से रिजर्वेशन पा सकते हैं :

टिकट विंडो पर जाकर पारंपरिक तरीके से रिजर्वेशन

– ऑनलाइन ई-रिजर्वेशन
– ऑनलाइन आई-रिजर्वेशन

E और I टिकट
आजकल ई-टिकट यानी इलेक्ट्रॉनिक टिकट का जमाना है। हर कोई टिकट रिजर्वेशन के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहा है। यहां रिजर्वेशन के दो ऑप्शन हैं। ई-रिजवेर्शन और आई-रिजर्वेशन। भले ही दोनों रिजर्वेशन घर बैठे कंप्यूटर से कराए जाते हैं लेकिन इनमें कुछ अंतर भी हैं।

– अगर आप फिजिकल टिकट चाहते हैं और टिकट विंडो पर जाने से भी बचना चाहते हैं तो आपको आई-टिकट लेना चाहिए। इस टिकट के साथ यात्रा करने पर आपको कोई आईडी प्रूफ दिखाने की जरूरत नहीं है। ई-टिकट के साथ अगर यात्रा कर रहे हैं तो यात्रा के दौरान आपके पास आईडी प्रूफ होना चाहिए।
– आई-टिकट दिए गए पते पर पोस्ट से पहुंचता है। आई-टिकट के लिए यात्रा से तीन दिन पहले बुकिंग करवानी पड़ेगी जबकि ई-टिकट यात्रा के कुछ घंटों पहले भी लिया जा सकता है।
– आई-टिकट के लिए आपको डाक खर्च भी भरना पड़ेगा जबकि ई-टिकट में आपका काम प्रिंटआउट या एसएमएस से भी चल सकता है।
– ई-टिकट के कई प्रिंट निकाले जा सकते हैं। आई-टिकट दोबारा लेने के लिए आपको फिर से चार्ज देना होगा। दोबारा आई-टिकट पाने के लिए आपको अपना पीएनआर नंबर भी याद होना चाहिए।

पैसेंजर की पहचान PNR
टिकट खिड़की से लिए गए पारंपरिक रिजर्वेशन टिकट के लेफ्ट साइड में ऊपर की ओर यह नंबर होता है। यह नंबर यूनीक होता है और इसे पैसेंजर नेम रेकॉर्ड नंबर कहा जाता है। यह टिकट आपका ही है और इस पर आप ही सफर कर रहे हैं इसका पता इस नंबर से ही चलता है। रेल का टिकट चूंकि नॉन ट्रांस्फरेबल होता है इसलिए आपके टिकट पर कोई और सफर करने का अधिकारी नहीं है। इस लिहाज से यह नंबर रेलवे और आपके दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण है। इंटरनेट या फोन, किसी भी माध्यम से अपने टिकट पर यात्रा की जानकारी आपके पीएनआर नंबर के जरिए ही मिलेगी। अच्छा होगा कि सफर की शुरुआत से पहले अपने पीएनआर नंबर को कहीं लिख लें या मोबाइल में सेव कर लें क्योंकि टिकट खो जाने की हालत में यही आपकी मदद करेगा। पीएनआर नंबर की मदद से आप ट्रेन नंबर, ट्रेन का नाम, डेस्टिनेशन की जानकारी, सफर का क्लास, टिकट का स्टेटस, पैसेंजर कोच और सीट नंबर का पता कर सकते हैं।

रूट की जन्म कुंडली ‘ट्रेन नंबर’
रिजर्वेशन टिकट पर जो दूसरा महत्वपूर्ण नंबर नजर आता है, वह है ट्रेन नंबर। ऐसा नहीं है कि यह नंबर बस ऐसे ही लिख दिया गया है। इस नंबर में ही आपकी ट्रेन के रूट के राज छुपे हैं। ट्रेन नंबर 5 डिजिट का होता है और इसका हर नंबर कुछ न कुछ कहता है। पहला नंबर यह बताता है कि जिस ट्रेन में आप सफर कर रहे हैं, वह किस तरह की पैसेंजर ट्रेन है। आपको थोड़ा आइडिया देते हैं- अगर आपके रिजर्वेशन टिकट पर लिखे ट्रेन नंबर की पहली डिजिट 0 है तो आप समर स्पेशल, हॉलिडे स्पेशल या अन्य स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले हैं। अगर पहली डिजिट 1 या 2 है तो लंबी दूरी की ट्रेन है जिसमें राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनें भी शामिल हैं। 3 नंबर से शुरू होने वाले ट्रेन नंबर कोलकाता की लोकल ट्रेनों का होता है। 4 नंबर से शुरू होने वाला ट्रेन नंबर दिल्ली, चेन्नै, सिकंदराबाद जैसे मेट्रो शहरों की रेल सेवाओं का होता है। 5 नंबर परंपरागत तरीके की ट्रेनों का होता है। 6 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेनें मेमू होती हैं और 7 नंबर से शुरू होने वाली डेमू। हाल ही में रिजर्व की गई ट्रेन का नंबर 8 होता है और 9 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेन मुंबई लोकल की होती हैं। इसी तरह आगे के चार और डिजिट भी अलग-अलग तरीके से ट्रेन के बारे में पूरी जानकारी देते हैं। भारतीय रेलवे के एक्सपर्ट ट्रेन नंबर देख कर ही ट्रेन के रूट की पूरी जानकारी दे सकते हैं।

इसके अलावा, रिजर्वेशन टिकट पर आसानी से समझ में आने वाली जानकारी, जैसे यात्रा की दूरी, तारीख और एडल्ट और बच्चों की जानकारी आपको आसानी से समझ में आ जाएगी। इसके अलावा टिकट का एक नंबर होता है जिससे जरूरत पड़ने पर यह पता लगाया जा सकता है कि यह कहां से लिया गया है। ई-रिजर्व टिकट पर आपको टिकट नंबर की जगह ट्रांजैक्शन नंबर मिलेगा। इसके नीचे आपको आपकी जर्नी के क्लास और आने-जाने की जगह का नाम मिलेगा। ई-टिकट पर तो आपको अपना फोन नंबर और पता लिखने का ऑप्शन भी मिलता है जो प्रिंटआउट में साफ दिखता है। अगर आपका टिकट कंफर्म है तब तो चिंता नहीं है लेकिन अगर कहीं वेटिंग का चक्कर है तो आपको रेलवे की अंग्रेजी की पाठशाला फिर से जॉइन करनी पड़ेगी।

WL का चक्कर
अपने टिकट कंफर्म न होने की टेंशन आपको होगी ही, साथ ही शॉर्ट फॉर्म में लिखे अंग्रेजी के कुछ अक्षर आपकी धड़कनें और बढ़ाएंगे। आइए नजर डालते हैं वेटिंग लिस्ट के कुछ ऐसे ही शॉर्ट फॉर्म्स पर और उनके मतलब पर…

RLWL: इसका मतलब है रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट। अगर दो बड़े स्टेशनों के बीच का कोई ऐसा स्टेशन है जहां से ज्यादा ट्रेनें मौजूद नहीं हैं तो वहां के यात्री को किसी कैंसलेशन की स्थिति में पहले सीट दी जाएगी। अगर इस तरह की वेटिंग लिस्ट ज्यादा भी है फिर भी सीट मिलने के चांस ज्यादा होते हैं।PQWL: कई छोटे स्टेशनों को जरूरत के हिसाब से कोटे में कुछ सीटें दी जाती हैं। अगर इन स्टेशनों से आप अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं और आपका टिकट वेटिंग में है तो आप पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट में आते हैं। इसका मतलब है कि पूल्ड कोटे के सारे टिकट रिजर्व हो चुके हैं और आप उस कोटे में वेटिंग लिस्ट में हैं।

CKWL : जब आप तत्काल कोटे में टिकट लेते हैं और आपकी टिकट वेटिंग में होती है तो इसे करंट कोटा वेटिंग लिस्ट में रखा जाता है। आमतौर पर इस तरह की वेटिंग लिस्ट 10 तक होने पर कंफर्म हो जाती है।

RQWL : इसे रिक्वेस्ट वेटिंग लिस्ट कहते हैं। अगर रूट में कोई पूल्ड कोटा नहीं है तो इस तरह की वेटिंग लिस्ट को बनाया जाता है।

कोटे तेरे कितने नाम
हर ट्रेन में कई तरह के रिजर्वेशन कोटे भी होते हैं जिनका शॉर्ट फॉर्म जनाना भी आपके काम आ सकता है।

LD : लेडीज कोटा
HQ: हाई ऑफिशल या हेडक्वॉर्टर कोटा
DF: डिफेंस कोटा
OS: आउट स्टेशन कोटा
RS: रोड साइड कोटा, बड़े स्टेशनों के बीच के ऐसे स्टेशन जो कंप्यूटराइज्ड नेटवर्क से न जुडे़ हों तब उन्हें रोड साइड कोटे में रख कर टिकट रिजर्व किए जाते हैं। इनमें वेटिंग लिस्ट भी होती है।
PH: पार्लियामेंट हाउस कोटा
FT: फॉरेन टूरिस्ट कोटा
DP: ड्यूटी पास कोटा
HP: हैंडिकैप कोटा
SS: सीनियर सिटीजन कोटा

UP-DOWN को भी समझें
जिस स्टेशन से ट्रेन शुरू होती है और अपने डेस्टिनेशन की तरफ जाती है तो वह अप ट्रेन कहलाती है। वापस आने की यात्रा को डाउन जर्नी कहते हैं। अगर कोई ट्रेन दिल्ली से अहमदाबाद के लिए शुरू हो रही है तो इसे अहमदाबाद की ओर अप ट्रेन कहेंगे जब यह वापस आएगी तो इसे अहमदाबाद से डाउन कहेंगे। डाउन ट्रेन का नंबर अप से एक ज्यादा रहता है। जैसे अगर अप ट्रेन का नंबर 20145 है तो डाउन का नंबर 20146 होगा।
सीट भी जान लें
अगर टिकट कंफर्म है तो सीट नंबर के अलावा टिकट देखकर आप उसकी पोजिशन भी जान सकते हैं। अगर आपकी बर्थ नंबर के सामने LB लिखा है तो इसका मतलब है लोअर यानी नीचे वाली बर्थ, अगर लिखा है MB तो इसका मतलब मिडल बर्थ, UB का स्वाभाविक मतलब है अपर बर्थ। इसके अलावा, अगर SU और SL लिखा है तो इसका मतलब साइड अपर और साइड लोअर बर्थ है। रेलवे सीनियर सिटिजन के लिए लोवर सीट ही देने की कोशिश करता है, बशर्ते ऐसी सीट उपलब्ध हो। ऑनलाइन रिजर्वेशन करवाने पर उपलब्धता के हिसाब से आप खुद ही सीट चुन सकते हैं।

रेलवे हेल्पलाइन की मदद लें
दिल्ली डिविजन के डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) ए. के. सचान ने रेल यात्रियों के रिजर्वेशन से जुड़े सवालों के जवाब दिए…

क्या कोई ऐसा नंबर है जहां जाकर टिकट संबंधी परेशानी को लेकर बात की जा सके?
लोगों को अगर स्टेशन पर कोई परेशानी हो तो स्टेशन मास्टर से संपर्क किया जा सकता है। कंफ्यूजन की स्थिति में यात्री रेलवे की वेबसाइट http://www.indianrail.gov.in/ और http://www.nr.indianrailways.gov.in पर जा सकते हैं। टिकटिंग को लेकर कोई अलग हेल्पलाइन तो नहीं है लेकिन कई तरह की और रेलवे हेल्पलाइन्स मदद कर सकती हैं। हमारी 9717630982 हेल्पलाइन भी मददगार हो सकती है। किसी परेशानी की शिकायत से ही हमें स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी।

क्या ऑनलाइन रिजर्वेशन से टिकट खिड़कियों पर दबाव कुछ कम हुआ है जिससे जरूरत पड़ने पर लोग वहां भी जाकर रिजर्वेशन करवा सकें?
जी हां। ऐसा हुआ है और हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि जिनके पास सुविधा है, वे घर बैठे ही रिजर्वेशन करवा सकें। अगर पास ही रेलवे रिजर्वेशन विंडो है तो जरूरत पड़ने पर इसका फायदा भी उठाया जा सकता है।

आने वाले दिनों में रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम में किस तरह के सुधार लाने की कोशिश कर रहा है?
हमारी पहली कोशिश यही है कि हम आईआरसीटीसी के साथ मिलकर सिस्टम को अधिक से अधिक लोगों के लिए रिजर्वेशन करवाने लायक बना सकें। रेलवे को लगातार सर्वर की शिकायतें मिलती हैं। जल्द ही इसमें सुधार के आसार हैं।

रिजर्वेशन को लेकर क्या आम आदमी रेलवे को कोई सुझाव दे सकता है?
हां। हमारा फेसबुक पेज है जहां दिए गए सुझावों पर हम हमेशा गौर करते हैं। इसके अलावा नॉर्दर्न रेलवे की साइट पर जाकर भी फीडबैक और सुझाव दिए जा सकते हैं। फेसबुक पेज यह है : http://www.facebook.com/pages/delhi-division-northern-railway/157913344263788

रिजर्वेशन करवाने वालों के लिए कोई सुझाव?
हमेशा ऑफिशल वेंडर से ही टिकट खरीदें और दूसरों के टिकट पर यात्रा न करें। ऐसा करने पर परेशानियां आपको ही उठानी पड़ेगी।